रायसेन में किसानों की नहीं बन रही फार्मर आईडी:जनसुनवाई में कलेक्टर ने दो दिन में जांच का आश्वासन दिया

रायसेन तहसील के ग्राम आमापानी (सूरई) सुनारी, ग्राम पंचायत पठारी के किसान मंगलवार को जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर पहुंचे। किसानों ने कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से सीधे मुलाकात कर फार्मर आईडी ऑनलाइन बनवाने की मांग की। उनका कहना है कि फार्मर आईडी न होने के कारण वे कई सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। कलेक्टर से ऑनलाइन फार्मर आईडी बनाने की मांग किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से फार्मर आईडी बनवाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। जनसुनवाई में उन्होंने कलेक्टर से अनुरोध किया कि इस समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए। पीएम किसान सम्मान निधि का नहीं मिल रहा लाभ फार्मर आईडी न बनने के कारण किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि वे छोटे और सीमांत किसान हैं और इस सहायता राशि से उन्हें खेती और परिवार चलाने में मदद मिलती है। वन विभाग के पट्टे को कारण मान रहे किसान किसानों ने बताया कि उनके पास वन विभाग द्वारा पट्टे पर दी गई जमीन है, जिस पर वे कई वर्षों से खेती कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि वन भूमि के पट्टे के कारण ही उनकी फार्मर आईडी स्वीकृत नहीं हो पा रही है। अन्य गांवों में पट्टाधारियों की बन चुकी है आईडी ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि नरवर, वर्रावाली, बड़ाखेड़ा बागराज, डामडोंगरी, बढकुई, मिलाया और सेमरा करार जैसे गांवों में पट्टे की जमीन पर भी किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। ऐसे में आमापानी (सूरई) सुनारी के किसानों को वंचित रखना उचित नहीं है। छोटे और गरीब किसानों की आर्थिक परेशानी किसानों ने कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं। फार्मर आईडी न होने से उन्हें सम्मान निधि की किस्त नहीं मिल रही, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। खेती के खर्च, बीज और खाद की व्यवस्था करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दो दिन में जांच का आश्वासन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने किसानों की बात गंभीरता से सुनी और उन्हें दो दिन के भीतर पूरे मामले की जांच कर समाधान कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। समाधान की उम्मीद में किसान जनसुनवाई से लौटते समय किसानों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी समस्या को प्राथमिकता से हल करेगा। उनका कहना है कि यदि समय पर फार्मर आईडी बन जाती है तो वे भी अन्य किसानों की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे और अपनी आर्थिक स्थिति सुधार पाएंगे।

रायसेन में किसानों की नहीं बन रही फार्मर आईडी:जनसुनवाई में कलेक्टर ने दो दिन में जांच का आश्वासन दिया
रायसेन तहसील के ग्राम आमापानी (सूरई) सुनारी, ग्राम पंचायत पठारी के किसान मंगलवार को जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर पहुंचे। किसानों ने कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से सीधे मुलाकात कर फार्मर आईडी ऑनलाइन बनवाने की मांग की। उनका कहना है कि फार्मर आईडी न होने के कारण वे कई सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। कलेक्टर से ऑनलाइन फार्मर आईडी बनाने की मांग किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से फार्मर आईडी बनवाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। जनसुनवाई में उन्होंने कलेक्टर से अनुरोध किया कि इस समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए। पीएम किसान सम्मान निधि का नहीं मिल रहा लाभ फार्मर आईडी न बनने के कारण किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि वे छोटे और सीमांत किसान हैं और इस सहायता राशि से उन्हें खेती और परिवार चलाने में मदद मिलती है। वन विभाग के पट्टे को कारण मान रहे किसान किसानों ने बताया कि उनके पास वन विभाग द्वारा पट्टे पर दी गई जमीन है, जिस पर वे कई वर्षों से खेती कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि वन भूमि के पट्टे के कारण ही उनकी फार्मर आईडी स्वीकृत नहीं हो पा रही है। अन्य गांवों में पट्टाधारियों की बन चुकी है आईडी ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि नरवर, वर्रावाली, बड़ाखेड़ा बागराज, डामडोंगरी, बढकुई, मिलाया और सेमरा करार जैसे गांवों में पट्टे की जमीन पर भी किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। ऐसे में आमापानी (सूरई) सुनारी के किसानों को वंचित रखना उचित नहीं है। छोटे और गरीब किसानों की आर्थिक परेशानी किसानों ने कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं। फार्मर आईडी न होने से उन्हें सम्मान निधि की किस्त नहीं मिल रही, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। खेती के खर्च, बीज और खाद की व्यवस्था करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दो दिन में जांच का आश्वासन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने किसानों की बात गंभीरता से सुनी और उन्हें दो दिन के भीतर पूरे मामले की जांच कर समाधान कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। समाधान की उम्मीद में किसान जनसुनवाई से लौटते समय किसानों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी समस्या को प्राथमिकता से हल करेगा। उनका कहना है कि यदि समय पर फार्मर आईडी बन जाती है तो वे भी अन्य किसानों की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे और अपनी आर्थिक स्थिति सुधार पाएंगे।