सतना के उपयंत्री सतीश समेले को हाईकोर्ट से राहत:अटैचमेंट के आदेश पर रोक; सीईओ ने अनुशासनहीनता, वित्तीय अनियमितता पर हटाया था

सतना जिले की जनपद पंचायत मझगवां के संविदा उपयंत्री सतीश समेले को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने जिला पंचायत सीईओ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें शासकीय कार्यों से अलग कर दूसरे कार्यालय से अटैच किया गया था। इस फैसले के बाद पंचायत विभाग में फिर हलचल तेज हो गई है। जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने 7 जुलाई को चार पेज का आदेश जारी किया था। इसमें सतीश समेले को सभी फील्ड कार्यों से हटाकर कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकीय संभाग, सतना कार्यालय से अटैच कर दिया गया था। आदेश में लगाए गए थे कई आरोप सीईओ के आदेश में सतीश समेले पर सरकारी कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर जाने, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना, शासकीय कार्यों में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता, शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने और आचरण नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से फील्ड की जिम्मेदारियों से अलग किया गया था। सतीश समेले ने सीईओ के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए अटैचमेंट के आदेश पर रोक लगा दी। पहले लगाए थे कमीशनखोरी के आरोप कार्यालय से अटैच किए जाने के बाद सतीश समेले ने मीडिया के सामने पंचायत से लेकर भोपाल तक कथित कमीशनखोरी के नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि उनके पास इस मामले से जुड़े दस्तावेजी सबूत हैं, जिन्हें वे हाईकोर्ट में पेश करेंगे। उनके इन आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना था। अब हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। विभागीय कार्रवाई और समेले के आरोपों के बीच आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

सतना के उपयंत्री सतीश समेले को हाईकोर्ट से राहत:अटैचमेंट के आदेश पर रोक; सीईओ ने अनुशासनहीनता, वित्तीय अनियमितता पर हटाया था
सतना जिले की जनपद पंचायत मझगवां के संविदा उपयंत्री सतीश समेले को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने जिला पंचायत सीईओ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें शासकीय कार्यों से अलग कर दूसरे कार्यालय से अटैच किया गया था। इस फैसले के बाद पंचायत विभाग में फिर हलचल तेज हो गई है। जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने 7 जुलाई को चार पेज का आदेश जारी किया था। इसमें सतीश समेले को सभी फील्ड कार्यों से हटाकर कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकीय संभाग, सतना कार्यालय से अटैच कर दिया गया था। आदेश में लगाए गए थे कई आरोप सीईओ के आदेश में सतीश समेले पर सरकारी कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर जाने, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना, शासकीय कार्यों में लापरवाही, वित्तीय अनियमितता, शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने और आचरण नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से फील्ड की जिम्मेदारियों से अलग किया गया था। सतीश समेले ने सीईओ के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए अटैचमेंट के आदेश पर रोक लगा दी। पहले लगाए थे कमीशनखोरी के आरोप कार्यालय से अटैच किए जाने के बाद सतीश समेले ने मीडिया के सामने पंचायत से लेकर भोपाल तक कथित कमीशनखोरी के नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि उनके पास इस मामले से जुड़े दस्तावेजी सबूत हैं, जिन्हें वे हाईकोर्ट में पेश करेंगे। उनके इन आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना था। अब हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। विभागीय कार्रवाई और समेले के आरोपों के बीच आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।