रोजी-रोटी कमाने गया था बेंगलुरु, करंट ने छीन लिया हाथ
रोजी-रोटी कमाने गया था बेंगलुरु, करंट ने छीन लिया हाथ
अब जिला अस्पताल में मदद और इंसाफ की आस में संतराम
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 24 जून। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और रोजी-रोटी कमाने की उम्मीद लेकर कर्नाटक के बेंगलुरु गया एक युवा मजदूर आज जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। केशकाल विकासखंड के चिकलाडीह निवासी संतराम नेताम 31 मई को काम के दौरान करंट की चपेट में आ गए। उपचार के दौरान उनका एक हाथ काटना पड़ा। अब संतराम को प्रशासन और कंपनी से मदद और इंसाफ की आस है।
संतराम ने बताया कि, वह बेंगलुरु के बेलूर क्षेत्र में विद्युत कार्य से जुड़े मजदूरी काम में लगे हुए थे। उनके अनुसार घटना वाले दिन उन्हें बताया गया कि, बिजली लाइन बंद है और ऊपर चढक़र काम किया जा सकता है। जैसे ही वह ऊपर चढ़े, लाइन में करंट प्रवाहित हो रहा था। अचानक आए तेज झटके ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और वह नीचे गिर पड़े। गंभीर रूप से झुलसे संतराम को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका आरोप है कि, दुर्घटना के बाद कंपनी और ठेकेदार ने जिम्मेदारी से हाथ खींच लिया। इलाज का खर्च उठाने से लेकर कोण्डागांव लौटने तक की व्यवस्था उन्हें स्वयं करनी पड़ी।
पीडि़त के अनुसार उपचार के दौरान डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए एक हाथ काटना पड़ा। दूसरा हाथ भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं है और उसकी नसों में रक्त संचार को लेकर चिकित्सकों ने चिंता जताई है। संतराम बताते हैं कि, बेंगलुरु में इलाज के दौरान भी उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। बाद में करीब 25 हजार रुपये खर्च कर वह अपने गृह जिले लौटे।
उनका कहना है कि, दुर्घटना के बाद कंपनी की ओर से न तो आर्थिक सहायता मिली और न ही परिवार की कोई सुध ली गई। आज जब वह शारीरिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से टूट चुके हैं, तब भी इलाज का खर्च उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
वह कहते हैं कि यदि कंपनी या ठेकेदार उनकी सहायता कर दे, मुआवजा दे दे या रोजगार की कोई व्यवस्था कर दे तो उनके परिवार को सहारा मिल सकता है।
अब जिला अस्पताल में मदद और इंसाफ की आस में संतराम
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 24 जून। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और रोजी-रोटी कमाने की उम्मीद लेकर कर्नाटक के बेंगलुरु गया एक युवा मजदूर आज जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। केशकाल विकासखंड के चिकलाडीह निवासी संतराम नेताम 31 मई को काम के दौरान करंट की चपेट में आ गए। उपचार के दौरान उनका एक हाथ काटना पड़ा। अब संतराम को प्रशासन और कंपनी से मदद और इंसाफ की आस है।
संतराम ने बताया कि, वह बेंगलुरु के बेलूर क्षेत्र में विद्युत कार्य से जुड़े मजदूरी काम में लगे हुए थे। उनके अनुसार घटना वाले दिन उन्हें बताया गया कि, बिजली लाइन बंद है और ऊपर चढक़र काम किया जा सकता है। जैसे ही वह ऊपर चढ़े, लाइन में करंट प्रवाहित हो रहा था। अचानक आए तेज झटके ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और वह नीचे गिर पड़े। गंभीर रूप से झुलसे संतराम को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका आरोप है कि, दुर्घटना के बाद कंपनी और ठेकेदार ने जिम्मेदारी से हाथ खींच लिया। इलाज का खर्च उठाने से लेकर कोण्डागांव लौटने तक की व्यवस्था उन्हें स्वयं करनी पड़ी।
पीडि़त के अनुसार उपचार के दौरान डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए एक हाथ काटना पड़ा। दूसरा हाथ भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं है और उसकी नसों में रक्त संचार को लेकर चिकित्सकों ने चिंता जताई है। संतराम बताते हैं कि, बेंगलुरु में इलाज के दौरान भी उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। बाद में करीब 25 हजार रुपये खर्च कर वह अपने गृह जिले लौटे।
उनका कहना है कि, दुर्घटना के बाद कंपनी की ओर से न तो आर्थिक सहायता मिली और न ही परिवार की कोई सुध ली गई। आज जब वह शारीरिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से टूट चुके हैं, तब भी इलाज का खर्च उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
वह कहते हैं कि यदि कंपनी या ठेकेदार उनकी सहायता कर दे, मुआवजा दे दे या रोजगार की कोई व्यवस्था कर दे तो उनके परिवार को सहारा मिल सकता है।