कोण्डागांव मेथोडिस्ट चर्च विवाद: पुलिस की समझाइश के बाद दोनों पक्षों में बनी सहमति
कोण्डागांव मेथोडिस्ट चर्च विवाद: पुलिस की समझाइश के बाद दोनों पक्षों में बनी सहमति
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 20 जुलाई। जिला मुख्यालय के सरगीपाल पारा स्थित डैनियल मेमोरियल मेथोडिस्ट चर्च में पास्टर की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद 19 जुलाई को एक बार फिर सामने आया।
10 जुलाई के बाद रविवार को चर्च से जुड़े दोनों पक्ष सिटी कोतवाली कोण्डागांव पहुंचे, जहां पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों गुटों की बैठक कर विवाद को शांत कराने का प्रयास किया गया। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए और चर्च संचालन को लेकर आगे का निर्णय संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं बिशप के निर्देश के अनुसार करने पर सहमति जताई।
मामले को लेकर सिटी कोतवाली प्रभारी सौरभ उपाध्याय ने बताया कि डैनियल मेथोडिस्ट चर्च में नवनियुक्त पास्टर सुरेश कुमार की नियुक्ति को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। पूर्व से चर्च में सेवाएं दे रहे कुछ सदस्यों द्वारा उनकी नियुक्ति का विरोध किया जा रहा है। विरोध करने वाले सदस्यों का कहना है कि सुरेश कुमार का पूर्व कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा और उनके ऊपर कई आरोप हैं, जिसके कारण वे उन्हें पास्टर के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहते।
ृटीआई ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने बुलाकर चर्चा की गई और शांति व्यवस्था बनाए रखने की समझाइश दी गई। उन्होंने कहा कि यह धार्मिक संस्था से जुड़ा मामला है, इसलिए पुलिस सीधे तौर पर निर्णय नहीं ले सकती। संस्था के बिशप और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लेंगे। तब तक दोनों पक्ष आपसी सहमति से शांतिपूर्ण तरीके से रहने और चर्च व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा गया है।
पास्टर सुरेश कुमार ने बताया कि संस्था की ओर से उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया है और वे रविवार सुबह 9 बजे से 11:30 बजे तक करीब 70-80 लोगों के साथ चर्च में प्रार्थना एवं उपासना कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि चर्च में ताला नहीं लगाया गया था, बल्कि कुछ लोगों की शिकायत के बाद सभी पक्षों को थाने बुलाया गया।
उन्होंने बताया कि आगे संस्था के नियमों और बिशप या कोर कमेटी के निर्णय के अनुसार ही कार्य किया जाएगा।
वहीं चर्च के वरिष्ठ सदस्य बसंत सामुअल ने बताया कि वे वर्षों से निर्धारित समय के अनुसार सुबह 9 बजे चर्च पहुंचते रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग निर्धारित समय से पहले चर्च पहुंचकर प्रार्थना में शामिल हुए, जिसके बाद विवाद की स्थिति बनी।
उन्होंने कहा कि उनका विरोध चर्च या संस्था से नहीं बल्कि नवनियुक्त पास्टर सुरेश कुमार की नियुक्ति को लेकर है। उन्होंने मांग की कि पास्टर को हटाया जाए ताकि चर्च की धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल सकें।
बसंत सामुअल ने यह भी कहा कि पुलिस बैठक में दोनों पक्षों को समझाइश दी गई है और पंचनामा तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने दोनों पक्षों से विवाद समाप्त कर सहमति बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि चर्च की संपत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं है, बल्कि मामला पास्टर की नियुक्ति को लेकर है।
गौरतलब है कि 10 जुलाई को भी डैनियल मेमोरियल मेथोडिस्ट चर्च में नए पास्टर सुरेश कुमार की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय चर्च के कुछ सदस्यों ने नियुक्ति का विरोध करते हुए कई आरोप लगाए थे, जबकि दूसरे पक्ष ने नियुक्ति को संस्था के आदेश के अनुसार बताते हुए समर्थन किया था। इसके बाद मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंचा था।
फिलहाल पुलिस की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने अस्थायी रूप से विवाद को शांत रखने पर सहमति जताई है। अब सभी की नजर चर्च की सर्वोच्च संस्था, बिशप और वरिष्ठ पदाधिकारियों के आगामी निर्णय पर टिकी हुई है।
छत्तीसगढ़ संवाददाता
कोण्डागांव, 20 जुलाई। जिला मुख्यालय के सरगीपाल पारा स्थित डैनियल मेमोरियल मेथोडिस्ट चर्च में पास्टर की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद 19 जुलाई को एक बार फिर सामने आया।
10 जुलाई के बाद रविवार को चर्च से जुड़े दोनों पक्ष सिटी कोतवाली कोण्डागांव पहुंचे, जहां पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों गुटों की बैठक कर विवाद को शांत कराने का प्रयास किया गया। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए और चर्च संचालन को लेकर आगे का निर्णय संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं बिशप के निर्देश के अनुसार करने पर सहमति जताई।
मामले को लेकर सिटी कोतवाली प्रभारी सौरभ उपाध्याय ने बताया कि डैनियल मेथोडिस्ट चर्च में नवनियुक्त पास्टर सुरेश कुमार की नियुक्ति को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। पूर्व से चर्च में सेवाएं दे रहे कुछ सदस्यों द्वारा उनकी नियुक्ति का विरोध किया जा रहा है। विरोध करने वाले सदस्यों का कहना है कि सुरेश कुमार का पूर्व कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा और उनके ऊपर कई आरोप हैं, जिसके कारण वे उन्हें पास्टर के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहते।
ृटीआई ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने बुलाकर चर्चा की गई और शांति व्यवस्था बनाए रखने की समझाइश दी गई। उन्होंने कहा कि यह धार्मिक संस्था से जुड़ा मामला है, इसलिए पुलिस सीधे तौर पर निर्णय नहीं ले सकती। संस्था के बिशप और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लेंगे। तब तक दोनों पक्ष आपसी सहमति से शांतिपूर्ण तरीके से रहने और चर्च व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा गया है।
पास्टर सुरेश कुमार ने बताया कि संस्था की ओर से उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया है और वे रविवार सुबह 9 बजे से 11:30 बजे तक करीब 70-80 लोगों के साथ चर्च में प्रार्थना एवं उपासना कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि चर्च में ताला नहीं लगाया गया था, बल्कि कुछ लोगों की शिकायत के बाद सभी पक्षों को थाने बुलाया गया।
उन्होंने बताया कि आगे संस्था के नियमों और बिशप या कोर कमेटी के निर्णय के अनुसार ही कार्य किया जाएगा।
वहीं चर्च के वरिष्ठ सदस्य बसंत सामुअल ने बताया कि वे वर्षों से निर्धारित समय के अनुसार सुबह 9 बजे चर्च पहुंचते रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग निर्धारित समय से पहले चर्च पहुंचकर प्रार्थना में शामिल हुए, जिसके बाद विवाद की स्थिति बनी।
उन्होंने कहा कि उनका विरोध चर्च या संस्था से नहीं बल्कि नवनियुक्त पास्टर सुरेश कुमार की नियुक्ति को लेकर है। उन्होंने मांग की कि पास्टर को हटाया जाए ताकि चर्च की धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल सकें।
बसंत सामुअल ने यह भी कहा कि पुलिस बैठक में दोनों पक्षों को समझाइश दी गई है और पंचनामा तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने दोनों पक्षों से विवाद समाप्त कर सहमति बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि चर्च की संपत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं है, बल्कि मामला पास्टर की नियुक्ति को लेकर है।
गौरतलब है कि 10 जुलाई को भी डैनियल मेमोरियल मेथोडिस्ट चर्च में नए पास्टर सुरेश कुमार की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय चर्च के कुछ सदस्यों ने नियुक्ति का विरोध करते हुए कई आरोप लगाए थे, जबकि दूसरे पक्ष ने नियुक्ति को संस्था के आदेश के अनुसार बताते हुए समर्थन किया था। इसके बाद मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंचा था।
फिलहाल पुलिस की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने अस्थायी रूप से विवाद को शांत रखने पर सहमति जताई है। अब सभी की नजर चर्च की सर्वोच्च संस्था, बिशप और वरिष्ठ पदाधिकारियों के आगामी निर्णय पर टिकी हुई है।