आईपीओ दिलाने शेयर मार्केट ब्रोकर, क्लाइंट से 84.63 लाख रुपए की ठगी

3-4 के गिरोह का कारनामा छत्तीसगढ़ संवाददाता रायपुर, 4 जून। शेयर मार्केट में आईपीओ दिलाने और अधिक मुनाफा कमाने का झांसा देकर शेयर मार्केट ब्रोकिंग फर्म के संचालक से 84.63 लाख रुपए का साइबर फ्रांड हो गया। अज्ञात तीन से चार लोगों ने फोन के माध्यम से संपर्क कर झांसे में लिया। अविनाश लोखंडे की शिकायत पर देवेन्द्र नगर थाना पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ 3(5), 318-4 का अपराध दर्ज किया है मामले में जांच की जा रही है। देवेन्द्र नगर निवासी अविनाश लोखंडे, जो शेयर मार्केट से जुड़े ब्रोकिंग फर्म संचालित करते हैं, ने बताया कि जून 2025 में उसके व्हाट्सएप पर किसी अज्ञात व्यक्ति का मैसेज आया था। जिसमें उसने खुद को निवेश सलाहकार राघव शर्मा, शैलेजा और निशा पटेल बताया। लोगों ने उन्हें इन्ड मनी कंपनी में निवेश कर अधिक लाभ कमाने का लालच दिया। शुरुआत में अविनाश को छोटे निवेश कराए गए। जिसका उसे लाभ भी दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने उसे आईपीओ शेयर बाजार मूल्य से कम दर पर दिलाने का भरोसा दिलाया। अच्छा इनकम आता देख अविनाश लोखंडे, उनकी पत्नी और उनके कुछ क्लाइंट्स से 84 लाख 63 हजार रुपए का इन्वेश्ट कराने विभिन्न बैंक में आरटीजीएस के माध्यम से रकम जमा कराए गए। रकम जमा होने के कुछ दिन बाद न तो आईपीओ दिया गया और न ही आरोपियों से संपर्क हो सका। उनके मोबाइल नंबर बंद हो गए। इसके बाद ट्रेडिंग एप भी काम करना बंद कर गया। ठगी होने का अहसास होने पर अविनाश ने इसकी शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। व्हाट्सएप चैट से शुरू हुई ठगी साइबर ठग ने पहले व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया था। फिर पोर्टफोलियों और शेयर से जूड़ी निवेश और आईपीओ और नई -नई स्किम बताकर भरोसे में लिया था। पहले छोटे निवेश से में प्रॉफीट फिर मोटी रकम हड़प लिए। कई बैंक खातों में भेजी गई रकम देवेन्द्र नगर पुलिस ने 84.63 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी के मामले में धनराशि के ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार रकम कई अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से भेजी गई थी। पुलिस अब उन खातों के संचालकों, मोबाइल नंबर धारकों , बैंकिंग ट्रेल की जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगी के लिए विभिन्न संस्थानों और फर्मों के नाम पर बैंक खाते इस्तेमाल किए गए। पुराने नम्बरों का इस्तेमाल साइबर ठग पुलिस को चकमा देने पुराने और गुम हुए मोबाइल नम्बरों का इस्तेमाल करते हैं। जांच करने पर कॉल करने वाले का नाम और पता दोनों ही अनजान व्यक्ति के नाम से रजिस्टर्ड।

आईपीओ दिलाने शेयर मार्केट ब्रोकर, क्लाइंट से 84.63 लाख रुपए की ठगी
3-4 के गिरोह का कारनामा छत्तीसगढ़ संवाददाता रायपुर, 4 जून। शेयर मार्केट में आईपीओ दिलाने और अधिक मुनाफा कमाने का झांसा देकर शेयर मार्केट ब्रोकिंग फर्म के संचालक से 84.63 लाख रुपए का साइबर फ्रांड हो गया। अज्ञात तीन से चार लोगों ने फोन के माध्यम से संपर्क कर झांसे में लिया। अविनाश लोखंडे की शिकायत पर देवेन्द्र नगर थाना पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ 3(5), 318-4 का अपराध दर्ज किया है मामले में जांच की जा रही है। देवेन्द्र नगर निवासी अविनाश लोखंडे, जो शेयर मार्केट से जुड़े ब्रोकिंग फर्म संचालित करते हैं, ने बताया कि जून 2025 में उसके व्हाट्सएप पर किसी अज्ञात व्यक्ति का मैसेज आया था। जिसमें उसने खुद को निवेश सलाहकार राघव शर्मा, शैलेजा और निशा पटेल बताया। लोगों ने उन्हें इन्ड मनी कंपनी में निवेश कर अधिक लाभ कमाने का लालच दिया। शुरुआत में अविनाश को छोटे निवेश कराए गए। जिसका उसे लाभ भी दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने उसे आईपीओ शेयर बाजार मूल्य से कम दर पर दिलाने का भरोसा दिलाया। अच्छा इनकम आता देख अविनाश लोखंडे, उनकी पत्नी और उनके कुछ क्लाइंट्स से 84 लाख 63 हजार रुपए का इन्वेश्ट कराने विभिन्न बैंक में आरटीजीएस के माध्यम से रकम जमा कराए गए। रकम जमा होने के कुछ दिन बाद न तो आईपीओ दिया गया और न ही आरोपियों से संपर्क हो सका। उनके मोबाइल नंबर बंद हो गए। इसके बाद ट्रेडिंग एप भी काम करना बंद कर गया। ठगी होने का अहसास होने पर अविनाश ने इसकी शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। व्हाट्सएप चैट से शुरू हुई ठगी साइबर ठग ने पहले व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया था। फिर पोर्टफोलियों और शेयर से जूड़ी निवेश और आईपीओ और नई -नई स्किम बताकर भरोसे में लिया था। पहले छोटे निवेश से में प्रॉफीट फिर मोटी रकम हड़प लिए। कई बैंक खातों में भेजी गई रकम देवेन्द्र नगर पुलिस ने 84.63 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी के मामले में धनराशि के ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार रकम कई अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से भेजी गई थी। पुलिस अब उन खातों के संचालकों, मोबाइल नंबर धारकों , बैंकिंग ट्रेल की जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगी के लिए विभिन्न संस्थानों और फर्मों के नाम पर बैंक खाते इस्तेमाल किए गए। पुराने नम्बरों का इस्तेमाल साइबर ठग पुलिस को चकमा देने पुराने और गुम हुए मोबाइल नम्बरों का इस्तेमाल करते हैं। जांच करने पर कॉल करने वाले का नाम और पता दोनों ही अनजान व्यक्ति के नाम से रजिस्टर्ड।