साइबर ठग बुजुर्गों को कर रहे टारगेट:एटीएस, सीबीआई और ईडी से रिटायर्ड अधिकारियों को फंसाते हैं; पुलिस ने दी चेतावनी

डिजिटल अरेस्ट के मामले में बुजुर्ग सबसे ज्यादा टारगेट होते हैं। यही वजह है कि साइबर ठग अक्सर इन्हीं लोगों को निशाने पर रखते हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश में हुई साइबर ठगी की घटनाओं में करीब 80 प्रतिशत शिकार रिटायर्ड अधिकारी और प्रोफेसर रहे हैं। हालांकि पुलिस समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहती है, फिर भी इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आई है। जबलपुर में साइबर जालसाजों ने तकनीक और सरकारी एजेंसियों की पहचान का दुरुपयोग करते हुए दो करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। ये ठग पुलिस, एटीएस और कस्टम अधिकारी बनकर घंटों तक डिजिटल अरेस्ट करते हैं और ठगी को अंजाम देते हैं। ऐसे फंसाते है साइबर ठग साइबर ठग सबसे पहले पीड़ित को कॉल करते हैं और कहते हैं कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या आतंकी नेटवर्क के पैसों में शामिल है। इसके बाद वे वीडियो कॉल के जरिए खुद को अधिकारी बताकर अपना ऑफिस दिखाते हैं। वर्दी देखकर पीड़ित डर जाता है और डिजिटल अरेस्ट यानी मोबाइल चालू रखकर लगातार कैमरे के सामने रहना—का पालन करने लगता है। पीड़ितों को धमकी दी जाती है कि अगर वे आदेश नहीं मानेंगे तो धोखाधड़ी या आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं, परिवार को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी जाती है। डर के चलते पीड़ित कई बार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। हाल की जबलुपर में हुई घटनाएं पुलिस ने कहा- सक्रिय रहे साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन अधिकांश कॉल और वीडियो चैट विदेशी सर्वर और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से की जा रही हैं, जिससे जांच कठिन हो रही है। एएसपी जितेंद्र सिंह का कहना है कि साइबर ठग हर दिन नई तकनीक और तरीकों से ठगी कर रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, टेलीग्राम इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिटायर्ड बुजुर्ग इन जालसाजों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी ऐसा इन्वेस्टमेंट न करें जो चंद दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा करे। कोई भी पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी की धमकी नहीं देता। किसी भी अनजान कॉल या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी थाने में दें।

साइबर ठग बुजुर्गों को कर रहे टारगेट:एटीएस, सीबीआई और ईडी से रिटायर्ड अधिकारियों को फंसाते हैं; पुलिस ने दी चेतावनी
डिजिटल अरेस्ट के मामले में बुजुर्ग सबसे ज्यादा टारगेट होते हैं। यही वजह है कि साइबर ठग अक्सर इन्हीं लोगों को निशाने पर रखते हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश में हुई साइबर ठगी की घटनाओं में करीब 80 प्रतिशत शिकार रिटायर्ड अधिकारी और प्रोफेसर रहे हैं। हालांकि पुलिस समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहती है, फिर भी इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आई है। जबलपुर में साइबर जालसाजों ने तकनीक और सरकारी एजेंसियों की पहचान का दुरुपयोग करते हुए दो करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। ये ठग पुलिस, एटीएस और कस्टम अधिकारी बनकर घंटों तक डिजिटल अरेस्ट करते हैं और ठगी को अंजाम देते हैं। ऐसे फंसाते है साइबर ठग साइबर ठग सबसे पहले पीड़ित को कॉल करते हैं और कहते हैं कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या आतंकी नेटवर्क के पैसों में शामिल है। इसके बाद वे वीडियो कॉल के जरिए खुद को अधिकारी बताकर अपना ऑफिस दिखाते हैं। वर्दी देखकर पीड़ित डर जाता है और डिजिटल अरेस्ट यानी मोबाइल चालू रखकर लगातार कैमरे के सामने रहना—का पालन करने लगता है। पीड़ितों को धमकी दी जाती है कि अगर वे आदेश नहीं मानेंगे तो धोखाधड़ी या आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं, परिवार को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी जाती है। डर के चलते पीड़ित कई बार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। हाल की जबलुपर में हुई घटनाएं पुलिस ने कहा- सक्रिय रहे साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन अधिकांश कॉल और वीडियो चैट विदेशी सर्वर और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से की जा रही हैं, जिससे जांच कठिन हो रही है। एएसपी जितेंद्र सिंह का कहना है कि साइबर ठग हर दिन नई तकनीक और तरीकों से ठगी कर रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, टेलीग्राम इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिटायर्ड बुजुर्ग इन जालसाजों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी ऐसा इन्वेस्टमेंट न करें जो चंद दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा करे। कोई भी पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी की धमकी नहीं देता। किसी भी अनजान कॉल या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी थाने में दें।