लाइसेंस होने के बाद भी हथियार नहीं रख सकते जवान:दूसरे प्रांतों से बने आर्म्स लाइसेंस MP में मान्य नहीं, 2500 से ज्यादा केस पेंडिंग

चार साल पहले सेना से रिटायर हुआ, पर अपने लाइसेंसी हथियार को अब तक ट्रांसफर नहीं करा पाया भिंड जिले के ऐंहतार गांव के रहने वाले सेवा निवृत्त सैनिक सुनील शर्मा का यह दर्द मध्यप्रदेश के हजारों रिटायर्ड और वर्तमान सैनिकों का है। उनकी सोच थी कि नौकरी से रिटायर्ड होने के बाद किसी प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में गार्ड की नौकरी करेंगे। वे चार साल पहले सेवा निवृत्त हो चुके हैं। इसके बाद लगातार वे अपने शस्त्र लाइसेंस को भिंड जिले में स्थानांतरित कराने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने बंदूक को पुलिस थाने में जमा करवा दिया है। वे इंतजार कर रहे है​ कि कब ट्रांसफर की प्र​क्रिया पूरी हो और वे अपनी बंदूक को पुलिस थाने से निकलवाएं। भिंड जिले में उनका मामला अकेला नहीं है। ऐसे मामलों की संख्या लगभग ढाई हजार से ज्यादा है। रिटायर्ड सैनिकों के अलावा कई वर्तमान जवान भी दूसरे राज्यों से बने लाइसेंस को घर पर रखे हुए हैं, क्योंकि ट्रांसफर और रिन्युअल प्रक्रिया लंबित है। इन प्रांतों से बने हैं शस्त्र लाइसेंस दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि भिंड जिले के कई रिटायर्ड फौजियों ने अपनी सेवा अवधि के दौरान पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू सहित अन्य राज्यों से शस्त्र लाइसेंस बनवाए थे। रिटायरमेंट के बाद ये जवान अपने लाइसेंसी हथियारों को भिंड जिले में अपने घर पर रखना चाहते हैं। इसके लिए वे बार-बार शस्त्र लाइसेंस के स्थानांतरण (ट्रांसफर) को लेकर आवेदन भी कर रहे हैं, लेकिन अब तक अधिकांश मामलों में प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। सूत्रों के मुताबिक जिले में ऐसे रिटायर्ड फौजियों की संख्या काफी अधिक है, जिनके शस्त्र लाइसेंस दूसरे राज्यों से जारी हुए थे और जिनका भिंड में पंजीयन नहीं हो सका है। नतीजतन, कुछ मामलों में ये हथियार प्रशासनिक स्वीकृति के बिना घरों में रखे हुए हैं, जो नियमों के तहत पूरी तरह अवैध माने जाते हैं। दो मामलों से समझिए पूरा मामला... केस-1: एनओसी होने के बाद भी भिंड में दर्ज नहीं हो सका लाइसेंस सेना की नौकरी से सेवानिवृत्त हुए मुन्नालाल जोशी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2010 में सेवा अवधि के दौरान आर्मी के सीईओ की अनुमति से शस्त्र लाइसेंस बनवाया था, जिसके तहत उन्होंने एक बंदूक भी खरीदी थी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने इसी बंदूक और शस्त्र लाइसेंस का उपयोग बैंक में सुरक्षा कर्मी की नौकरी के लिए किया। वर्तमान में वे अपने शस्त्र लाइसेंस को जम्मू राज्य से स्थानांतरित कर भिंड जिले में पंजीयन कराना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने जम्मू की लाइसेंसिंग अथॉरिटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त कर भिंड में संबंधित कार्यालय में जमा करा दिया है। इसके बावजूद अब तक उनका शस्त्र लाइसेंस भिंड जिले में दर्ज नहीं हो सका है। इस स्थिति के चलते उन्हें लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए बार-बार जम्मू जाना पड़ रहा है, जिससे न केवल समय और पैसा खर्च हो रहा है, बल्कि उन्हें लगातार अनावश्यक परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है। केस-2: एनओसी के लिए अमृतसर–चंडीगढ़ के चक्कर, तब जाकर दर्ज हुआ लाइसेंस रिटायर्ड फौजी बसंत सिंह राजावत ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1995 में अपनी सेवा अवधि के दौरान फौज के अधिकारी की अनुमति से अमृतसर से शस्त्र लाइसेंस बनवाया था। रिटायरमेंट के बाद जब उन्होंने इस लाइसेंस को भिंड जिले में स्थानांतरित कर पंजीयन कराने की प्रक्रिया शुरू की, तो उन्हें कई स्तर पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बसंत सिंह राजावत के अनुसार, उन्होंने स्वयं अमृतसर और चंडीगढ़ से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त कर भिंड जिले के शस्त्र शाखा कार्यालय में जमा कराई। इसके बाद ही उनका शस्त्र लाइसेंस भिंड जिले में दर्ज हो सका और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी हो पाई। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े और मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने बताया कि भिंड जिले में आज भी ऐसे कई रिटायर्ड सैनिक हैं, जिनके शस्त्र लाइसेंस जम्मू, अमृतसर, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से सेवा अवधि के दौरान जारी हुए थे, लेकिन अब तक वे भिंड जिले में दर्ज नहीं हो सके हैं। इन सैनिकों को अपने हथियारों के संबंध में लंबे समय से असमंजस और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या लंबे समय से बनी, हजारों लाइसेंस अटके इंडियन वेटर ऑर्गेनाइजेशन के जिला संयोजक सुनील शर्मा ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी यह समस्या कई सालों पुरानी है। उनके अनुसार, भिंड जिले में करीब ढाई हजार से अधिक ऐसे शस्त्र लाइसेंस हैं, जो फौजियों द्वारा अपनी सेवा अवधि के दौरान अन्य जिलों या राज्यों से बनवाए गए थे और जिन्हें ऑल इंडिया लाइसेंस के तहत रखने की अनुमति होती है। उन्होंने कहा कि जब रिटायर्ड फौजी इन शस्त्र लाइसेंसों को भिंड जिले में स्थानांतरित (ट्रांसफर) कराने के लिए आवेदन करते हैं, तो जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। इसका नतीजा यह है कि कई शस्त्र लाइसेंस लंबे समय से या तो थानों में जमा पड़े हैं या फिर लोगों के घरों में रखे हुए हैं, लेकिन उनका भिंड जिले में पंजीयन नहीं हो पा रहा है। अध्यक्ष बोले: कलेक्टर से कई बार मिल चुका हूं पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष राकेश सिंह कुशवाह ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस के स्थानांतरण को लेकर वे दो से तीन बार कलेक्टर से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे कई रिटायर्ड फौजी हैं, जिनकी बंदूक का लाइसेंस जम्मू से जारी हुआ है और जिनका भिंड जिले में अब तक स्थानांतरण नहीं हो पा रहा है। राकेश सिंह कुशवाह के अनुसार, इन लंबित मामलों को लेकर वे पुनः कलेक्टर से मुलाकात करेंगे, ताकि रिटायर्ड फौजियों की शस्त्र लाइसेंस संबंधी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। कलेक्टर बोले: दूसरे प्रांतों से एनओसी नहीं आने से अटकी प्रक्रिया भिंड कलेक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि वर्तमान में यह स्पष्ट रूप से बताना मुश्किल है कि जिले में कितने शस्त्र

लाइसेंस होने के बाद भी हथियार नहीं रख सकते जवान:दूसरे प्रांतों से बने आर्म्स लाइसेंस MP में मान्य नहीं, 2500 से ज्यादा केस पेंडिंग
चार साल पहले सेना से रिटायर हुआ, पर अपने लाइसेंसी हथियार को अब तक ट्रांसफर नहीं करा पाया भिंड जिले के ऐंहतार गांव के रहने वाले सेवा निवृत्त सैनिक सुनील शर्मा का यह दर्द मध्यप्रदेश के हजारों रिटायर्ड और वर्तमान सैनिकों का है। उनकी सोच थी कि नौकरी से रिटायर्ड होने के बाद किसी प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में गार्ड की नौकरी करेंगे। वे चार साल पहले सेवा निवृत्त हो चुके हैं। इसके बाद लगातार वे अपने शस्त्र लाइसेंस को भिंड जिले में स्थानांतरित कराने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने बंदूक को पुलिस थाने में जमा करवा दिया है। वे इंतजार कर रहे है​ कि कब ट्रांसफर की प्र​क्रिया पूरी हो और वे अपनी बंदूक को पुलिस थाने से निकलवाएं। भिंड जिले में उनका मामला अकेला नहीं है। ऐसे मामलों की संख्या लगभग ढाई हजार से ज्यादा है। रिटायर्ड सैनिकों के अलावा कई वर्तमान जवान भी दूसरे राज्यों से बने लाइसेंस को घर पर रखे हुए हैं, क्योंकि ट्रांसफर और रिन्युअल प्रक्रिया लंबित है। इन प्रांतों से बने हैं शस्त्र लाइसेंस दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि भिंड जिले के कई रिटायर्ड फौजियों ने अपनी सेवा अवधि के दौरान पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू सहित अन्य राज्यों से शस्त्र लाइसेंस बनवाए थे। रिटायरमेंट के बाद ये जवान अपने लाइसेंसी हथियारों को भिंड जिले में अपने घर पर रखना चाहते हैं। इसके लिए वे बार-बार शस्त्र लाइसेंस के स्थानांतरण (ट्रांसफर) को लेकर आवेदन भी कर रहे हैं, लेकिन अब तक अधिकांश मामलों में प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। सूत्रों के मुताबिक जिले में ऐसे रिटायर्ड फौजियों की संख्या काफी अधिक है, जिनके शस्त्र लाइसेंस दूसरे राज्यों से जारी हुए थे और जिनका भिंड में पंजीयन नहीं हो सका है। नतीजतन, कुछ मामलों में ये हथियार प्रशासनिक स्वीकृति के बिना घरों में रखे हुए हैं, जो नियमों के तहत पूरी तरह अवैध माने जाते हैं। दो मामलों से समझिए पूरा मामला... केस-1: एनओसी होने के बाद भी भिंड में दर्ज नहीं हो सका लाइसेंस सेना की नौकरी से सेवानिवृत्त हुए मुन्नालाल जोशी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2010 में सेवा अवधि के दौरान आर्मी के सीईओ की अनुमति से शस्त्र लाइसेंस बनवाया था, जिसके तहत उन्होंने एक बंदूक भी खरीदी थी। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने इसी बंदूक और शस्त्र लाइसेंस का उपयोग बैंक में सुरक्षा कर्मी की नौकरी के लिए किया। वर्तमान में वे अपने शस्त्र लाइसेंस को जम्मू राज्य से स्थानांतरित कर भिंड जिले में पंजीयन कराना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने जम्मू की लाइसेंसिंग अथॉरिटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त कर भिंड में संबंधित कार्यालय में जमा करा दिया है। इसके बावजूद अब तक उनका शस्त्र लाइसेंस भिंड जिले में दर्ज नहीं हो सका है। इस स्थिति के चलते उन्हें लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए बार-बार जम्मू जाना पड़ रहा है, जिससे न केवल समय और पैसा खर्च हो रहा है, बल्कि उन्हें लगातार अनावश्यक परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है। केस-2: एनओसी के लिए अमृतसर–चंडीगढ़ के चक्कर, तब जाकर दर्ज हुआ लाइसेंस रिटायर्ड फौजी बसंत सिंह राजावत ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1995 में अपनी सेवा अवधि के दौरान फौज के अधिकारी की अनुमति से अमृतसर से शस्त्र लाइसेंस बनवाया था। रिटायरमेंट के बाद जब उन्होंने इस लाइसेंस को भिंड जिले में स्थानांतरित कर पंजीयन कराने की प्रक्रिया शुरू की, तो उन्हें कई स्तर पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बसंत सिंह राजावत के अनुसार, उन्होंने स्वयं अमृतसर और चंडीगढ़ से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त कर भिंड जिले के शस्त्र शाखा कार्यालय में जमा कराई। इसके बाद ही उनका शस्त्र लाइसेंस भिंड जिले में दर्ज हो सका और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी हो पाई। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े और मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने बताया कि भिंड जिले में आज भी ऐसे कई रिटायर्ड सैनिक हैं, जिनके शस्त्र लाइसेंस जम्मू, अमृतसर, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से सेवा अवधि के दौरान जारी हुए थे, लेकिन अब तक वे भिंड जिले में दर्ज नहीं हो सके हैं। इन सैनिकों को अपने हथियारों के संबंध में लंबे समय से असमंजस और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या लंबे समय से बनी, हजारों लाइसेंस अटके इंडियन वेटर ऑर्गेनाइजेशन के जिला संयोजक सुनील शर्मा ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी यह समस्या कई सालों पुरानी है। उनके अनुसार, भिंड जिले में करीब ढाई हजार से अधिक ऐसे शस्त्र लाइसेंस हैं, जो फौजियों द्वारा अपनी सेवा अवधि के दौरान अन्य जिलों या राज्यों से बनवाए गए थे और जिन्हें ऑल इंडिया लाइसेंस के तहत रखने की अनुमति होती है। उन्होंने कहा कि जब रिटायर्ड फौजी इन शस्त्र लाइसेंसों को भिंड जिले में स्थानांतरित (ट्रांसफर) कराने के लिए आवेदन करते हैं, तो जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। इसका नतीजा यह है कि कई शस्त्र लाइसेंस लंबे समय से या तो थानों में जमा पड़े हैं या फिर लोगों के घरों में रखे हुए हैं, लेकिन उनका भिंड जिले में पंजीयन नहीं हो पा रहा है। अध्यक्ष बोले: कलेक्टर से कई बार मिल चुका हूं पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष राकेश सिंह कुशवाह ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस के स्थानांतरण को लेकर वे दो से तीन बार कलेक्टर से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे कई रिटायर्ड फौजी हैं, जिनकी बंदूक का लाइसेंस जम्मू से जारी हुआ है और जिनका भिंड जिले में अब तक स्थानांतरण नहीं हो पा रहा है। राकेश सिंह कुशवाह के अनुसार, इन लंबित मामलों को लेकर वे पुनः कलेक्टर से मुलाकात करेंगे, ताकि रिटायर्ड फौजियों की शस्त्र लाइसेंस संबंधी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। कलेक्टर बोले: दूसरे प्रांतों से एनओसी नहीं आने से अटकी प्रक्रिया भिंड कलेक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि वर्तमान में यह स्पष्ट रूप से बताना मुश्किल है कि जिले में कितने शस्त्र लाइसेंस के मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि लगातार ऐसे फौजी उनके पास पहुंच रहे हैं, जो दूसरे प्रांतों से जारी आर्म्स लाइसेंस को भिंड जिले में स्थानांतरित कराना चाहते हैं। कलेक्टर के अनुसार, इन मामलों में संबंधित प्रांत के गृह विभाग (होम डिपार्टमेंट) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिलने के कारण भिंड में लाइसेंस स्थानांतरण की प्रक्रिया अटक जाती है। इसी वजह से रिटायर्ड फौजियों के दूसरे राज्यों से जारी शस्त्र लाइसेंस भिंड जिले में दर्ज नहीं हो पा रहे हैं।