बैतूल में ट्रैक्टर खरीदने आदिवासियों से ठगी:कागजातों पर करवाए दस्तखत, अब बैंक से किश्त भरने आ रहे कॉल, कलेक्टर से की शिकायत
बैतूल में ट्रैक्टर खरीदने आदिवासियों से ठगी:कागजातों पर करवाए दस्तखत, अब बैंक से किश्त भरने आ रहे कॉल, कलेक्टर से की शिकायत
बैतूल के भैंसदेही और आठनेर के आधा दर्जन से ज्यादा आदिवासियों को झांसा देकर उनके नाम से ट्रैक्टर खरीदने का मामला सामने आया है। आदिवासियों को तब पता चला जब उन्हें बैंक से वसूली के लिए कॉल आना शुरू हुए। आदिवासियों ने मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के साथ कलेक्टर और एसपी से शिकायत की। जिस पर जांच के आदेश दिए गए हैं। पीड़ित आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि गोंडी ढाना के राजेश नाम के शख्स ने झूठ बोलकर हमारे आधार कार्ड की कॉपी लेकर हमें ट्रैक्टर दिलाने का झूठा आश्वासन दिया। लेकिन हमें आज तक कोई ट्रैक्टर नहीं मिला। अब बैंक से किश्त चुकाने का फोन आ रहा है। झूठ बोलकर कागजातों पर करवाए गए हस्ताक्षर
आदिवासी किसानों के मुताबिक उनसे झूठ बोलकर कुछ कागजों पर साइन कराए गए। उन्होंने 24 दिसंबर को जनसुनवाई में कलेक्टर और आठनेर थाने में शिकायत की थी। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब आशंका है कि हमारी जमीन-मकान भी इस फर्जी खरीदी के कारण बिक न जाए। आदिवासियों का कहना है कि न तो हमे कोई ट्रैक्टर मिला न तो हमे कोई कागज मिला। डैम के नाम पर दिया गया झांसा
आदिवासियों ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि गांव में बहुत बड़ा डेम बन रहा है। जिसमें ट्रेक्टरों की जरूरत है। तुम अपना आधार कार्ड दे दो। हम ट्रैक्टर 2 वर्ष में तुम्हारे नाम पर करवा देंगे और तुम्हें हर महीने पैसे दिया करेंगे। वे झांसे में आ गए। अब किश्त वसूली के लिए बैंक उन्हें लगातार फोन कर रहे हैं।
बैतूल के भैंसदेही और आठनेर के आधा दर्जन से ज्यादा आदिवासियों को झांसा देकर उनके नाम से ट्रैक्टर खरीदने का मामला सामने आया है। आदिवासियों को तब पता चला जब उन्हें बैंक से वसूली के लिए कॉल आना शुरू हुए। आदिवासियों ने मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के साथ कलेक्टर और एसपी से शिकायत की। जिस पर जांच के आदेश दिए गए हैं। पीड़ित आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि गोंडी ढाना के राजेश नाम के शख्स ने झूठ बोलकर हमारे आधार कार्ड की कॉपी लेकर हमें ट्रैक्टर दिलाने का झूठा आश्वासन दिया। लेकिन हमें आज तक कोई ट्रैक्टर नहीं मिला। अब बैंक से किश्त चुकाने का फोन आ रहा है। झूठ बोलकर कागजातों पर करवाए गए हस्ताक्षर
आदिवासी किसानों के मुताबिक उनसे झूठ बोलकर कुछ कागजों पर साइन कराए गए। उन्होंने 24 दिसंबर को जनसुनवाई में कलेक्टर और आठनेर थाने में शिकायत की थी। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब आशंका है कि हमारी जमीन-मकान भी इस फर्जी खरीदी के कारण बिक न जाए। आदिवासियों का कहना है कि न तो हमे कोई ट्रैक्टर मिला न तो हमे कोई कागज मिला। डैम के नाम पर दिया गया झांसा
आदिवासियों ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि गांव में बहुत बड़ा डेम बन रहा है। जिसमें ट्रेक्टरों की जरूरत है। तुम अपना आधार कार्ड दे दो। हम ट्रैक्टर 2 वर्ष में तुम्हारे नाम पर करवा देंगे और तुम्हें हर महीने पैसे दिया करेंगे। वे झांसे में आ गए। अब किश्त वसूली के लिए बैंक उन्हें लगातार फोन कर रहे हैं।