खरगोन की ध्रुवी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम:3 साल की बच्ची को याद है 180 देशों की राजधानियां; फिजिक्स-गणित की भी जानकारी

खरगोन जिले में एक छोटी सी बच्ची ने अपनी असाधारण प्रतिभा से सबको चौंका दिया है। भगवानपुरा के मदनी खुर्द की रहने वाली साढ़े तीन वर्षीय ध्रुवी मंडलोई ने बिना स्कूल गए कई उपलब्धियां हासिल की हैं। ध्रुवी को 15 फरवरी को नई दिल्ली में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड द्वारा सम्मानित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय कन्वोकेशन सेंटर में वाइस चेयरपर्सन डॉ. न्यून हॉग आह और चीफ एडिटर डॉ. विश्व स्वरूप रॉय चौधरी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया। जनवरी में उन्हें वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकार्ड्स से भी सम्मानित किया जा चुका है। कार्टून देखने के दाैरान चला प्रतिभा का पता किसान पिता अजयसिंह मंडलोई ने बताया कि ध्रुवी की प्रतिभा का पता टीवी कार्टून से चला। वह कार्टून देखकर उनके बारे में तेजी से जानकारी बताने लगी। इसके बाद माता-पिता ने घर पर ही बेटी को पढ़ाना शुरू किया। ध्रुवी ने मात्र एक महीने में दुनिया के 180 देशों और भारत के सभी राज्यों की राजधानियों के नाम सीख लिए। खेल-खेल में घर में ही पढ़ाया ध्रुवी के पिता एमए तक पढ़े हैं और मां साधना 12वीं पास हैं। छोटी उम्र के कारण स्कूल में एडमिशन नहीं मिला। फिर माता-पिता ने घर पर ही खेल-खेल में पढ़ाना शुरू किया। ध्रुवी को सामान्य ज्ञान के अलावा फिजिक्स, केमेस्ट्री, गणित और इतिहास की भी जानकारी है। कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद अजय अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाना चाहते हैं। उनका सपना है कि ध्रुवी उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक बड़े पद पर पहुंचे।

खरगोन की ध्रुवी का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम:3 साल की बच्ची को याद है 180 देशों की राजधानियां; फिजिक्स-गणित की भी जानकारी
खरगोन जिले में एक छोटी सी बच्ची ने अपनी असाधारण प्रतिभा से सबको चौंका दिया है। भगवानपुरा के मदनी खुर्द की रहने वाली साढ़े तीन वर्षीय ध्रुवी मंडलोई ने बिना स्कूल गए कई उपलब्धियां हासिल की हैं। ध्रुवी को 15 फरवरी को नई दिल्ली में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड द्वारा सम्मानित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय कन्वोकेशन सेंटर में वाइस चेयरपर्सन डॉ. न्यून हॉग आह और चीफ एडिटर डॉ. विश्व स्वरूप रॉय चौधरी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया। जनवरी में उन्हें वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकार्ड्स से भी सम्मानित किया जा चुका है। कार्टून देखने के दाैरान चला प्रतिभा का पता किसान पिता अजयसिंह मंडलोई ने बताया कि ध्रुवी की प्रतिभा का पता टीवी कार्टून से चला। वह कार्टून देखकर उनके बारे में तेजी से जानकारी बताने लगी। इसके बाद माता-पिता ने घर पर ही बेटी को पढ़ाना शुरू किया। ध्रुवी ने मात्र एक महीने में दुनिया के 180 देशों और भारत के सभी राज्यों की राजधानियों के नाम सीख लिए। खेल-खेल में घर में ही पढ़ाया ध्रुवी के पिता एमए तक पढ़े हैं और मां साधना 12वीं पास हैं। छोटी उम्र के कारण स्कूल में एडमिशन नहीं मिला। फिर माता-पिता ने घर पर ही खेल-खेल में पढ़ाना शुरू किया। ध्रुवी को सामान्य ज्ञान के अलावा फिजिक्स, केमेस्ट्री, गणित और इतिहास की भी जानकारी है। कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद अजय अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाना चाहते हैं। उनका सपना है कि ध्रुवी उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक बड़े पद पर पहुंचे।