उज्जैन में सिख समाज ने निकाली शौर्य रैली:वीर बाल दिवस पर केसरिया दुपट्टा पहन महिलाएं भी हुई शामिल; गुरु के अटूट लंगर की सेवा
उज्जैन में सिख समाज ने निकाली शौर्य रैली:वीर बाल दिवस पर केसरिया दुपट्टा पहन महिलाएं भी हुई शामिल; गुरु के अटूट लंगर की सेवा
उज्जैन में गुरुवार को सिख समाज ने वीर बाल दिवस के मौके पर शौर्य रैली का आयोजन किया। इस रैली में सिख समाज के महिला, पुरुष और बच्चे सफेद और केसरिया वस्त्र पहनकर शामिल हुए। रैली का आयोजन गुरूद्वारा सुख सागर से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए बुधवारिया स्थित गुरूद्वारा माता गुजरी पर समापन हुआ। रैली के बाद गुरु के अटूट लंगर की सेवा की गई। फ्रीगंज स्थित गुरूद्वारा सुख सागर से शौर्य रैली का आयोजन सिख समाज द्वारा किया गया। सिख समाज के संरक्षक इकबाल सिंह गांधी ने बताया कि 26 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीर बाल दिवस घोषित किया गया है। इस दिन को श्रद्धांजलि स्वरूप यह रैली आयोजित की गई। रैली फ्रीगंज गुरूद्वारा से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई गुरूद्वारा माता गुजरी पर समाप्त हुई। यहां पर गुरु के अटूट लंगर की सेवा की गई। वाहन रैली में शामिल होने के लिए पुरुषों ने सफेद वस्त्र और केसरिया पगड़ी पहनी थी, वहीं महिलाओं ने सफेद सलवार सूट और केसरिया दुपट्टा पहना था। रैली का शहर में जोरदार स्वागत किया गया। इस रैली में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति कलावती यादव, चरणजीत सिंह कालरा, बाबा त्रिलोचन सिंह सरपंच, खत्री अरोड वंशीय समाज के अध्यक्ष अजय जुल्का सहित सिख समाज के महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। शहर के इन मार्गों से निकली रैली शौर्य रैली फ्रीगंज गुरूद्वारा से प्रारंभ होकर माधव नगर हॉस्पिटल के सामने, गुरु नानक मार्केट, शहीद पार्क, चामुंडा माता मंदिर, देवास गेट, मालीपूरा, दौलतगंज, फव्वारा चौक, नई सड़क, कंठल, सती गेट, छत्री चौक, ढाबा रोड होते हुए निकास और गुरूद्वारा माता गुजरी बुधवारिया पर समाप्त हुई। यहां रैली के समापन पर गुरु के अटूट लंगर की सेवा की गई। वीर बाल दिवस क्यों मनाया जाता है सिख समाज के संभागीय प्रवक्ता एस. एस. नारंग ने बताया कि सिखों के दसवें गुरु साहिब, गुरु गोविंद सिंह महाराज ने धर्म और देश की रक्षा के लिए केवल एक सप्ताह में अपने परिवार और अनेक सिखों सहित अपने चारों साहिबजादों का बलिदान कर दिया। 21 दिसंबर से 28 दिसंबर तक का सप्ताह वह समय है, जब यह बलिदान हुआ था। गुरु गोविंद सिंह के बड़े साहिबजादे चमकोर की जंग में शहीद हो गए थे, जबकि छोटे साहिबजादे सरहिंद में दीवारों में जिंदा चुनवा कर शहीद किए गए। माता गुजरी भी ठंडे बुर्ज में शहीद हो गईं। शत्रु उन्हें लालच और बहकावे से थकाने में असफल रहे, लेकिन साहिबजादों का हौसला हमेशा मजबूत रहा। इन शहीदों ने यह सिद्ध कर दिया कि जीवन में बड़े कीर्तिमान स्थापित करने के लिए लंबी उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और जज्बे की जरूरत होती है। साहिबजादों ने जुल्म और अन्याय के खिलाफ सत्य और धर्म की आवाज उठाई और अपनी जान की कुर्बानी दी। इसलिए आज समूचा सिख समाज इन्हें शहीदों को 'बाबा कलम' के नाम से याद करता है। देखे आयोजन से जुड़ी तस्वीरें...
उज्जैन में गुरुवार को सिख समाज ने वीर बाल दिवस के मौके पर शौर्य रैली का आयोजन किया। इस रैली में सिख समाज के महिला, पुरुष और बच्चे सफेद और केसरिया वस्त्र पहनकर शामिल हुए। रैली का आयोजन गुरूद्वारा सुख सागर से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए बुधवारिया स्थित गुरूद्वारा माता गुजरी पर समापन हुआ। रैली के बाद गुरु के अटूट लंगर की सेवा की गई। फ्रीगंज स्थित गुरूद्वारा सुख सागर से शौर्य रैली का आयोजन सिख समाज द्वारा किया गया। सिख समाज के संरक्षक इकबाल सिंह गांधी ने बताया कि 26 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीर बाल दिवस घोषित किया गया है। इस दिन को श्रद्धांजलि स्वरूप यह रैली आयोजित की गई। रैली फ्रीगंज गुरूद्वारा से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई गुरूद्वारा माता गुजरी पर समाप्त हुई। यहां पर गुरु के अटूट लंगर की सेवा की गई। वाहन रैली में शामिल होने के लिए पुरुषों ने सफेद वस्त्र और केसरिया पगड़ी पहनी थी, वहीं महिलाओं ने सफेद सलवार सूट और केसरिया दुपट्टा पहना था। रैली का शहर में जोरदार स्वागत किया गया। इस रैली में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति कलावती यादव, चरणजीत सिंह कालरा, बाबा त्रिलोचन सिंह सरपंच, खत्री अरोड वंशीय समाज के अध्यक्ष अजय जुल्का सहित सिख समाज के महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। शहर के इन मार्गों से निकली रैली शौर्य रैली फ्रीगंज गुरूद्वारा से प्रारंभ होकर माधव नगर हॉस्पिटल के सामने, गुरु नानक मार्केट, शहीद पार्क, चामुंडा माता मंदिर, देवास गेट, मालीपूरा, दौलतगंज, फव्वारा चौक, नई सड़क, कंठल, सती गेट, छत्री चौक, ढाबा रोड होते हुए निकास और गुरूद्वारा माता गुजरी बुधवारिया पर समाप्त हुई। यहां रैली के समापन पर गुरु के अटूट लंगर की सेवा की गई। वीर बाल दिवस क्यों मनाया जाता है सिख समाज के संभागीय प्रवक्ता एस. एस. नारंग ने बताया कि सिखों के दसवें गुरु साहिब, गुरु गोविंद सिंह महाराज ने धर्म और देश की रक्षा के लिए केवल एक सप्ताह में अपने परिवार और अनेक सिखों सहित अपने चारों साहिबजादों का बलिदान कर दिया। 21 दिसंबर से 28 दिसंबर तक का सप्ताह वह समय है, जब यह बलिदान हुआ था। गुरु गोविंद सिंह के बड़े साहिबजादे चमकोर की जंग में शहीद हो गए थे, जबकि छोटे साहिबजादे सरहिंद में दीवारों में जिंदा चुनवा कर शहीद किए गए। माता गुजरी भी ठंडे बुर्ज में शहीद हो गईं। शत्रु उन्हें लालच और बहकावे से थकाने में असफल रहे, लेकिन साहिबजादों का हौसला हमेशा मजबूत रहा। इन शहीदों ने यह सिद्ध कर दिया कि जीवन में बड़े कीर्तिमान स्थापित करने के लिए लंबी उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और जज्बे की जरूरत होती है। साहिबजादों ने जुल्म और अन्याय के खिलाफ सत्य और धर्म की आवाज उठाई और अपनी जान की कुर्बानी दी। इसलिए आज समूचा सिख समाज इन्हें शहीदों को 'बाबा कलम' के नाम से याद करता है। देखे आयोजन से जुड़ी तस्वीरें...