आदिवासियों के घर तोड़ने का विरोध:देवास में वन विभाग की कार्रवाई पर रोक की मांग, बालाघाट में खेती से रोका

देवास जिले की खातेगांव तहसील के खिवनी गांव में वन विभाग द्वारा आदिवासी परिवारों के घरों को बुलडोजर से तोड़ने की कार्रवाई का विरोध हुआ है। आदिवासी कांग्रेस के नेतृत्व में बालाघाट जिले से पहुंचे आदिवासियों ने कलेक्ट्रेट में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष धरमसिंह मरकाम ने बताया कि वन विभाग पुलिस बल की मदद से जबरदस्ती आदिवासियों के घरों को तोड़ रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को सरकार के संरक्षण में होने का आरोप लगाया। साथ ही मांग की कि सरकार इस कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाए। बालाघाट जिले में एक अन्य मामला सामने आया है। आदिवासी प्रतिनिधि भुवनसिंह कोर्राम के अनुसार मछुरदा और अडोरी पंचायत के 13-14 गांवों में रहने वाली संरक्षित बैगा जनजाति को वन विभाग खेती करने से रोक रहा है। ये आदिवासी पीढ़ियों से यहां खेती कर रहे हैं। उन्होंने सालेटेकरी और बिरसा के वन अधिकारियों को इस पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की है। बैगा आदिवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर 10 दिनों के भीतर प्रशासन वन विभाग के अधिकारियों को आदेशित नहीं करता है, तो दोनों पंचायतों के सभी गांवों के बैगा आदिवासी परिवार कलेक्ट्रेट के सामने धरना देंगे।

आदिवासियों के घर तोड़ने का विरोध:देवास में वन विभाग की कार्रवाई पर रोक की मांग, बालाघाट में खेती से रोका
देवास जिले की खातेगांव तहसील के खिवनी गांव में वन विभाग द्वारा आदिवासी परिवारों के घरों को बुलडोजर से तोड़ने की कार्रवाई का विरोध हुआ है। आदिवासी कांग्रेस के नेतृत्व में बालाघाट जिले से पहुंचे आदिवासियों ने कलेक्ट्रेट में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष धरमसिंह मरकाम ने बताया कि वन विभाग पुलिस बल की मदद से जबरदस्ती आदिवासियों के घरों को तोड़ रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को सरकार के संरक्षण में होने का आरोप लगाया। साथ ही मांग की कि सरकार इस कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाए। बालाघाट जिले में एक अन्य मामला सामने आया है। आदिवासी प्रतिनिधि भुवनसिंह कोर्राम के अनुसार मछुरदा और अडोरी पंचायत के 13-14 गांवों में रहने वाली संरक्षित बैगा जनजाति को वन विभाग खेती करने से रोक रहा है। ये आदिवासी पीढ़ियों से यहां खेती कर रहे हैं। उन्होंने सालेटेकरी और बिरसा के वन अधिकारियों को इस पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की है। बैगा आदिवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर 10 दिनों के भीतर प्रशासन वन विभाग के अधिकारियों को आदेशित नहीं करता है, तो दोनों पंचायतों के सभी गांवों के बैगा आदिवासी परिवार कलेक्ट्रेट के सामने धरना देंगे।