रैली निकालकर NSS स्वयंसेवक दे रहे स्वच्छता का संदेश:शिक्षा, नशा-नाश जैसे विषयों पर नाटक प्रदर्शित कर जागरूकता फैला रहे

कसरावद (कुंडिया बसाहट) की गलियों में "स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत" के नारों से गूंज उठी। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के शासकीय उत्कृष्ट उमावि क्रमांक एक बड़वानी की 1 और 2 इकाई के 7 दिवसीय विशेष शिविर के पांचवें दिन 147 घरों में जाकर स्वच्छता पखवाड़ा के बारे में जागरूकता फैलाई गई। ग्रामीणों को गांव और घर को साफ रखने के तरीके बताए गए और प्लास्टिक मुक्त भारत के लिए प्रेरित किया गया। स्वयंसेवक आदित्य खेड़े, सुदीप सेन, सुमित राठौर और भूपेंद्र धनगर ने ग्रामीणों से संवाद कर प्लास्टिक का उपयोग बंद करने और गांव को स्वच्छ रखने की अपील की। शिविर के दौरान प्रातः योग, प्राणायाम, और व्यायाम के बाद स्वयंसेवकों ने गांव में सफाई का काम किया। शिवकुंज में वन देवी और आदियोगी प्रतिमा के पास उगी खरपतवार को हटाया गया और पौधों के आसपास 800 से अधिक थालों का निर्माण किया गया। ड्रिप वाटर सप्लाई टंकी के आसपास गाजर घास और खरपतवार को साफ किया गया। इस मौके पर सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी ने स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और बेटियों पर आधारित कविताएं सुनाई। शिविर की सांस्कृतिक संध्या में स्वयंसेवकों ने शिक्षा, नशा और नाश जैसे विषयों पर रोचक नाटकों का प्रदर्शन किया, जिससे लोगों में जागरूकता फैलाने की कोशिश की गई।

कसरावद (कुंडिया बसाहट) की गलियों में "स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत" के नारों से गूंज उठी। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के शासकीय उत्कृष्ट उमावि क्रमांक एक बड़वानी की 1 और 2 इकाई के 7 दिवसीय विशेष शिविर के पांचवें दिन 147 घरों में जाकर स्वच्छता पखवाड़ा के बारे में जागरूकता फैलाई गई। ग्रामीणों को गांव और घर को साफ रखने के तरीके बताए गए और प्लास्टिक मुक्त भारत के लिए प्रेरित किया गया। स्वयंसेवक आदित्य खेड़े, सुदीप सेन, सुमित राठौर और भूपेंद्र धनगर ने ग्रामीणों से संवाद कर प्लास्टिक का उपयोग बंद करने और गांव को स्वच्छ रखने की अपील की। शिविर के दौरान प्रातः योग, प्राणायाम, और व्यायाम के बाद स्वयंसेवकों ने गांव में सफाई का काम किया। शिवकुंज में वन देवी और आदियोगी प्रतिमा के पास उगी खरपतवार को हटाया गया और पौधों के आसपास 800 से अधिक थालों का निर्माण किया गया। ड्रिप वाटर सप्लाई टंकी के आसपास गाजर घास और खरपतवार को साफ किया गया। इस मौके पर सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी ने स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और बेटियों पर आधारित कविताएं सुनाई। शिविर की सांस्कृतिक संध्या में स्वयंसेवकों ने शिक्षा, नशा और नाश जैसे विषयों पर रोचक नाटकों का प्रदर्शन किया, जिससे लोगों में जागरूकता फैलाने की कोशिश की गई।